प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए गुरु की महत्ता और भारतीय ज्ञान परंपरा का संदेश साझा किया। बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उन्होंने एक प्रेरक संस्कृत श्लोक पोस्ट करते हुए गुरु के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा, “गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं। आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं।”
इसके साथ ही उन्होंने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया—
“प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।
शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”
इस श्लोक का भावार्थ है कि जो प्रेरणा देता है, सही दिशा दिखाता है, ज्ञान का उपदेश करता है, उचित मार्ग का दर्शन कराता है, शिक्षा प्रदान करता है और सत्य का बोध कराकर आत्मविकास का मार्ग प्रशस्त करता है, वही गुरु के छह प्रमुख स्वरूप माने गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से लगातार भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन से जुड़े प्रेरक संदेश साझा कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने प्रकृति संरक्षण और धर्म के साथ संतुलित जीवन का संदेश देने वाला एक संस्कृत श्लोक साझा किया था। वहीं सोमवार को उन्होंने चरित्र और सदाचार के महत्व पर आधारित श्लोक “शीलवान् पूजितो लोके…” पोस्ट कर समाज में अच्छे आचरण के महत्व को रेखांकित किया था।
प्रधानमंत्री नियमित रूप से अपने संदेशों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उनका यह संदेश गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षकों और ज्ञान की संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त करता है।
