भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक बार फिर खुले, समावेशी, पारदर्शी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। जिनेवा में आयोजित भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा के अंतिम सत्र में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ में सुधार विकासोन्मुख होना चाहिए, जिससे विकासशील देशों के नीतिगत अधिकार सुरक्षित रहें, संगठन की विश्वसनीयता मजबूत हो और पहले से तय किए गए दायित्वों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ में सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने भारत की ओर से खुले, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य व्यापार एवं निवेश व्यवस्था के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराया।
उन्होंने कहा कि भारत द्वारा किए गए शुल्क सुधार, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का सरलीकरण और मुक्त व्यापार समझौतों की महत्वाकांक्षी रणनीति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ देश के एकीकरण को मजबूत किया है। साथ ही इन कदमों ने घरेलू विकास लक्ष्यों को भी गति प्रदान की है।
वाणिज्य सचिव ने वित्तीय समावेशन, डिजिटल वाणिज्य, लॉजिस्टिक्स के आधुनिकीकरण और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत समावेशी और नवाचार-आधारित विकास मॉडल के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
21 और 23 जुलाई को आयोजित व्यापार नीति समीक्षा के दोनों सत्रों में विश्व व्यापार संगठन के 68 सदस्य देशों ने अपने विचार रखे। इससे भारत की आर्थिक प्रगति और व्यापार नीतियों के प्रति वैश्विक स्तर पर बढ़ती रुचि का संकेत मिलता है। राजेश अग्रवाल ने सभी सदस्य देशों का सक्रिय भागीदारी और भारत की व्यापार नीतियों में रुचि दिखाने के लिए आभार व्यक्त किया।
